मुस्लिम बच्चियों को सहना पड़ता है पीड़ादायक दर्द, मुल्तानी मिट्टी का लेप लगा ब्लेड से कर दी जाती है खतना
इस प्रथा में बच्चियों के प्राइवेट पार्ट में कुछ अंश को ब्लेड से काट दिया जाता है। इस दौरान बच्चियों को बेहोश भी नहीं किया जाता है। कुछ महिलाएं बच्ची के हाथ-पैर पकड़ते हैं और एक महिला मुल्तानी मिट्टी लगाकर ब्लेड से सामने का हिस्सा काट देती है। इस प्रक्रिया के बाद बच्चियां दर्द से कई महीनों तक छटपटाती हैं। साथ ही कई मामलों में में इन्फेक्शन के कारण उनकी मौत भी हो जाती हैं।
क्यों होता है खतना?
इस्लाम के मुताबिक, इस प्रथा के बाद महिलाएं अपने पति के प्रति ज्यादा वफादार रहती हैं। ऐसा माना जाता है कि अगर महिला की सेक्स में रूचि रहती है तो ये गलत है। उसे सेक्स एन्जॉय करने का कोई हक़ नहीं है। इसलिए खतना प्रथा के जरिए महिला के प्राइवेट पार्ट्स को काट दिया जाता है।
कई तरह के हैं नुकसान
Source :- Asianet
इस प्रक्रिया में एक ही ब्लेड से कई खतना करने पर इन्फेक्शन फ़ैल जाता है। साथ ही महिलाएं बांझपन का भी शिकार हो जाती हैं। कई केसेस में ज्यादा खून बहने के कारण बच्चियों की मौत भी हो जाती है। कुछ दर्द ना सह पाने के कारण कोमा में चली जाती हैं।
क्यों होता है खतना?

इस्लाम के मुताबिक, इस प्रथा के बाद महिलाएं अपने पति के प्रति ज्यादा वफादार रहती हैं। ऐसा माना जाता है कि अगर महिला की सेक्स में रूचि रहती है तो ये गलत है। उसे सेक्स एन्जॉय करने का कोई हक़ नहीं है। इसलिए खतना प्रथा के जरिए महिला के प्राइवेट पार्ट्स को काट दिया जाता है।
कई तरह के हैं नुकसान
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इस प्रक्रिया में एक ही ब्लेड से कई खतना करने पर इन्फेक्शन फ़ैल जाता है। साथ ही महिलाएं बांझपन का भी शिकार हो जाती हैं। कई केसेस में ज्यादा खून बहने के कारण बच्चियों की मौत भी हो जाती है। कुछ दर्द ना सह पाने के कारण कोमा में चली जाती हैं।
मुस्लिम बच्चियों को सहना पड़ता है पीड़ादायक दर्द, मुल्तानी मिट्टी का लेप लगा ब्लेड से कर दी जाती है खतना
Reviewed by Realpost today
on
January 29, 2020
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